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Monday, July 6, 2026

बदलती दुनिया में भारत की बढ़ती जिम्मेदारी

 संपादकीय: 

बदलती दुनिया में भारत की बढ़ती जिम्मेदारी

अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)


आज का विश्व केवल आर्थिक प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि विश्वास, साझेदारी और स्थिरता का भी है। भारत की विदेश नीति, घरेलू प्रशासन और विकास की दिशा इस बात का संकेत दे रही है कि देश अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की ओर अग्रसर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा इसी बदलते भारत का प्रतीक है। रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के प्रयास यह दर्शाते हैं कि भारत अपनी "एक्ट ईस्ट" नीति को नए आयाम दे रहा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ता सहयोग केवल दोनों देशों के हित में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शांति और संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण है।

दूसरी ओर, देश के कई हिस्सों में भारी वर्षा और उससे उत्पन्न चुनौतियाँ हमें यह याद दिलाती हैं कि विकास के साथ-साथ आपदा प्रबंधन, शहरी नियोजन और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का संकट नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता है। प्रशासन की तत्परता आवश्यक है, किंतु दीर्घकालिक समाधान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण उससे भी अधिक महत्वपूर्ण हैं।

भारत आज विश्व मंच पर अपनी प्रतिष्ठा बढ़ा रहा है, लेकिन किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी आंतरिक व्यवस्था, सुशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय और नागरिकों के विश्वास से निर्धारित होती है। यदि विदेश नीति की सफलता के साथ घरेलू व्यवस्थाएँ भी समान गति से मजबूत हों, तो भारत वास्तव में विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ सकता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, विपक्ष, उद्योग, मीडिया और समाज—सभी राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए रचनात्मक भूमिका निभाएँ। लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति संवाद, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व है।

दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एण्ड पब्लिकेशन्स (पंजीकृत) का मानना है कि भारत के सामने अवसर भी बड़े हैं और चुनौतियाँ भी। विवेकपूर्ण नीतियाँ, राष्ट्रीय एकता और जनभागीदारी ही देश को सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर ले जाएँगी।

दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एण्ड पब्लिकेशन्स (पंजीकृत)

Sunday, July 5, 2026

काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच की 203वीं गोष्ठी संपन्न, नई कार्यकारिणी का गठन

 

काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच की 203वीं गोष्ठी संपन्न, नई कार्यकारिणी का गठन



दैनिक नव परिधि:

वरिष्ठ साहित्यकारों का सम्मान, कवि सम्मेलन में गूंजे गीत, ग़ज़ल और व्यंग्य

वाराणसी, 4 जुलाई। 

काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच, पंजीकृत, वाराणसी की 203वीं शनिवारिय साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन शनिवार को हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में नई कार्यकारिणी का गठन किया गया तथा कवि सम्मेलन का भी आयोजन हुआ, जिसमें नगर एवं आसपास के अनेक प्रतिष्ठित कवियों, शायरों और साहित्यकारों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता देश के वरिष्ठ कवि एवं पत्रकार ई. राम नरेश "नरेश" ने की। मुख्य अतिथि के रूप में दीपक दबंग तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध ग़ज़लकार डॉ. पुष्पेन्द्र अस्थाना उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन मुनींद्र पाण्डेय 'मुन्ना' ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के नवनियुक्त सचिव विजय चन्द्र त्रिपाठी द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। इसके उपरांत साहित्यिक गोष्ठी में हास्य-व्यंग्य कवि भुलक्कड़ बनारसी, जयप्रकाश मिश्र (धानापुर), सत्यनारायण, मुनींद्र पाण्डेय 'मुन्ना', वहीद इकबाल लोहतवी, डॉ. विनोद कुमार स्वामी, गणेश सिंह 'प्रहरी', सुबोध सिन्हा 'बच्चा बिहारी', डॉ. दिनेश दत्त पाठक, ई. राम नरेश 'नरेश', दीपक दबंग, डॉ. पुष्पेन्द्र अस्थाना, जितेंद्र नाथ श्रीवास्तव 'टोपी', मोहकम बनारसी, विजय चन्द्र त्रिपाठी, आशिक बनारसी, विमल बिहारी, उमेश सिंह सहित अनेक रचनाकारों ने गीत, ग़ज़ल, मुक्तक एवं हास्य-व्यंग्य रचनाओं का प्रभावशाली काव्य पाठ किया।

गोष्ठी के दौरान जुलाई 2026 से जुलाई 2028 तक के लिए संस्था की नई कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। संस्था ने बताया कि नवनियुक्त पदाधिकारियों की विस्तृत सूची शीघ्र ही प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जारी की जाएगी।

इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार ई. राम नरेश "नरेश" को संस्था की ओर से अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं ई. राम नरेश ने भी अपनी संस्था चन्द्रा साहित्य परिषद की ओर से काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच के अध्यक्ष भुलक्कड़ बनारसी को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. दिनेश दत्त पाठक ने उपस्थित सभी साहित्यकारों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। अल्पाहार के उपरांत गोष्ठी का समापन किया गया।

— संवाददाता
दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एण्ड पब्लिकेशंस (पंजीकृत)

अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)


Saturday, July 4, 2026

बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत की बढ़ती भूमिका


संपादकीय: 

बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत की बढ़ती भूमिका

अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)


विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। एक ओर पश्चिम एशिया और यूरोप में जारी तनाव वैश्विक शांति और व्यापार को प्रभावित कर रहे हैं, तो दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी चुनौतियाँ पूरी दुनिया के सामने नए प्रश्न खड़े कर रही हैं। इन परिस्थितियों में भारत ने संतुलित कूटनीति, आर्थिक स्थिरता और वैश्विक सहयोग की नीति के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई है।

हाल के दिनों में भारत ने अनेक देशों के साथ रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। यह केवल व्यापार बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका का भी संकेत है। भारत आज विकासशील देशों की आवाज़ के रूप में उभर रहा है और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

दूसरी ओर, देश के भीतर मानसून, कृषि, बुनियादी ढाँचे और रोजगार जैसे मुद्दे आम नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़े हैं। कई राज्यों में भारी वर्षा और बाढ़ जैसी परिस्थितियाँ यह याद दिलाती हैं कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की चुनौती है। सरकारों के साथ-साथ समाज को भी आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति अधिक संवेदनशील होना होगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर भी सतर्कता आवश्यक है। सीमाओं की सुरक्षा, आंतरिक शांति और साइबर सुरक्षा आज समान रूप से महत्वपूर्ण विषय बन चुके हैं। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत को अपनी सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और कूटनीति के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

आज आवश्यकता इस बात की है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को केवल समाचार के रूप में न देखा जाए, बल्कि उनके दीर्घकालिक प्रभावों को भी समझा जाए। एक जागरूक समाज ही सही निर्णय ले सकता है और लोकतंत्र को अधिक मजबूत बना सकता है।

दैनिक नव परिधि का मानना है कि तथ्यपरक, निष्पक्ष और उत्तरदायी पत्रकारिता ही समाज को सही दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम है। बदलती दुनिया में भारत के सामने अवसर भी हैं और चुनौतियाँ भी। यदि दूरदृष्टि, सुशासन और जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ा जाए, तो भारत न केवल अपनी विकास यात्रा को गति देगा, बल्कि विश्व समुदाय में एक विश्वसनीय और जिम्मेदार नेतृत्वकर्ता के रूप में अपनी भूमिका को और सुदृढ़ करेगा।

दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एण्ड पब्लिकेशन्स (पंजीकृत)


ब्रिटेन में हिंदुओं की स्थिति: धार्मिक पहचान, संस्थागत चुनौतियाँ और सामाजिक प्रभाव

 ब्रिटेन में हिंदुओं की स्थिति: धार्मिक पहचान, संस्थागत चुनौतियाँ और सामाजिक प्रभाव

दैनिक नव परिधि:



कैम्ब्रिजशायर के मंदिर विवाद के संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट

भूमिका

ब्रिटेन को लंबे समय से बहुसांस्कृतिक और धार्मिक स्वतंत्रता वाले लोकतांत्रिक देश के रूप में देखा जाता है। वहाँ हिंदू समुदाय शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार और तकनीकी क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देता है। इसके बावजूद, कई क्षेत्रों में हिंदू समुदाय को धार्मिक अवसंरचना (मंदिर, सामुदायिक केंद्र आदि) के विकास में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कैम्ब्रिजशायर के नॉर्थस्टो में मंदिर के लिए भूमि न मिलने का मामला इसी व्यापक प्रश्न को सामने लाता है।

1. कैम्ब्रिजशायर का मामला

नॉर्थस्टो में स्थानीय परिषद ने धार्मिक उपयोग के लिए उपलब्ध भूमि एक हिंदू संस्था के बजाय चर्च नेटवर्क को आवंटित की। चर्च के प्रस्ताव में मुस्लिम समुदाय के लिए इस्लामिक प्रार्थना कक्ष और शिक्षा केंद्र भी शामिल था, जबकि हिंदू संस्था ने मंदिर, बहुधार्मिक सामुदायिक केंद्र तथा वेलबीइंग सेंटर का प्रस्ताव दिया था।

मूल्यांकन में चर्च प्रस्ताव को 81% और हिंदू संस्था को 65% अंक दिए गए। परिषद का कहना है कि निर्णय निर्धारित मानकों के आधार पर लिया गया, जबकि हिंदू संस्था ने प्रक्रिया की पारदर्शिता और मूल्यांकन प्रणाली पर प्रश्न उठाए हैं।

2. धार्मिक अवसंरचना की कमी

कैम्ब्रिजशायर में अनेक चर्च और मस्जिदें हैं, लेकिन कोई स्थायी हिंदू मंदिर नहीं है। इसके परिणामस्वरूप:

हिंदू परिवारों को पूजा के लिए दूर-दराज़ शहरों की यात्रा करनी पड़ती है।

बच्चों और युवाओं की धार्मिक एवं सांस्कृतिक भागीदारी सीमित हो जाती है।

त्योहारों का सामूहिक आयोजन कठिन हो जाता है।

मूर्तियों और पूजा सामग्री को अस्थायी स्थानों पर रखना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा भी प्रभावित होती है।

3. सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव

इस स्थिति का प्रभाव केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है।

नई पीढ़ी का सांस्कृतिक जुड़ाव कमजोर पड़ सकता है।

सामुदायिक एकता प्रभावित होती है।

प्रवासी परिवारों में अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने की चुनौती बढ़ जाती है।

बच्चों को भारतीय परंपराओं और संस्कारों का प्रत्यक्ष अनुभव कम मिल पाता है।

4. निर्णय पर उठे प्रश्न

हिंदू समाज नॉर्थस्टो ने निम्नलिखित मुद्दे उठाए हैं:

मूल्यांकन प्रक्रिया पर्याप्त पारदर्शी नहीं थी।

वित्तीय रिकॉर्ड से संबंधित अपेक्षाएँ पहले स्पष्ट नहीं की गईं।

आवश्यक दस्तावेज़ों और मानकों की पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

यदि ये आरोप सही सिद्ध होते हैं, तो भविष्य में परिषद की निर्णय प्रक्रिया की समीक्षा आवश्यक हो सकती है।

5. ब्रिटेन में हिंदू समुदाय की व्यापक स्थिति

ब्रिटेन का अधिकांश हिंदू समुदाय आर्थिक और सामाजिक रूप से सफल माना जाता है। फिर भी कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं:

सभी क्षेत्रों में समान धार्मिक सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं।

नए विकसित शहरों में मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों का अभाव है।

भूमि आवंटन और निर्माण स्वीकृतियों में प्रशासनिक कठिनाइयाँ सामने आती हैं।

छोटे हिंदू समुदायों के पास बड़े धार्मिक संस्थानों जैसी वित्तीय क्षमता नहीं होती।

6. सकारात्मक पक्ष

यह भी ध्यान देना आवश्यक है कि:

ब्रिटेन में अनेक बड़े और प्रसिद्ध हिंदू मंदिर सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं।

हिंदू त्योहारों को कई नगरों में सार्वजनिक रूप से मनाया जाता है।

सरकार और स्थानीय प्रशासन अनेक अवसरों पर धार्मिक स्वतंत्रता और बहुसांस्कृतिक कार्यक्रमों को समर्थन भी देते हैं।

इसलिए कैम्ब्रिजशायर की घटना को पूरे ब्रिटेन की स्थिति का प्रतिनिधि उदाहरण मानना उचित नहीं होगा, लेकिन यह स्थानीय स्तर पर मौजूद चुनौतियों को अवश्य उजागर करती है।

निष्कर्ष

कैम्ब्रिजशायर का विवाद यह दर्शाता है कि धार्मिक स्वतंत्रता केवल कानूनी अधिकार भर नहीं, बल्कि उसके लिए आवश्यक संस्थागत सुविधाएँ भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। यदि किसी क्षेत्र में किसी समुदाय के लिए पूजा-स्थल उपलब्ध नहीं है, तो उसकी सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियाँ स्वाभाविक रूप से प्रभावित होती हैं।

साथ ही, यह भी आवश्यक है कि किसी एक घटना के आधार पर पूरे ब्रिटेन में हिंदुओं की स्थिति के बारे में व्यापक निष्कर्ष न निकाला जाए। निष्पक्ष दृष्टिकोण यही होगा कि यदि परिषद की प्रक्रिया पारदर्शी थी तो उसका सम्मान किया जाए, और यदि उसमें कमियाँ थीं तो अपील एवं न्यायिक समीक्षा जैसे वैधानिक उपाय अपनाए जाएँ। यह मामला ब्रिटेन में धार्मिक समानता, प्रशासनिक पारदर्शिता और अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक आवश्यकताओं पर गंभीर चर्चा का विषय बन सकता है।

दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एण्ड पब्लिकेशंस (पंजीकृत)

अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)


Wednesday, July 1, 2026

बदलती विश्व राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका

 संपादकीय

बदलती विश्व राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका

अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)


विश्व राजनीति में भारत की सक्रिय उपस्थिति लगातार मजबूत हो रही है। आज सामने आए घटनाक्रम इस बात का संकेत हैं कि भारत केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैशिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

भारत-जापान शिखर वार्ता इसी दिशा का महत्वपूर्ण उदाहरण है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। यह साझेदारी केवल आर्थिक नहीं, बल्कि एशिया में स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने का भी प्रयास है। ऐसे समय में जब वैश्विक शक्ति संतुलन बदल रहा है, भारत और जापान का सहयोग पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

दूसरी ओर, भारत-पाकिस्तान के बीच जारी कूटनीतिक तनाव यह दर्शाता है कि आतंकवाद और सीमा सुरक्षा के मुद्दे अब भी दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं। पाकिस्तान द्वारा भारतीय दावों का खंडन करना नई बात नहीं है, लेकिन ऐसे मामलों का समाधान केवल बयानबाजी से नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई और पारदर्शिता से ही संभव है। क्षेत्रीय शांति के लिए आतंकवाद के विरुद्ध स्पष्ट और प्रभावी कदम आवश्यक हैं।

भारत-मलेशिया रक्षा सहयोग की समीक्षा भी भारत की "एक्ट ईस्ट" नीति को नई मजबूती देती है। सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास, समुद्री सुरक्षा और उभरते सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग यह संकेत देता है कि भारत अपने मित्र देशों के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक संबंध विकसित कर रहा है। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन और सुरक्षा व्यवस्था को भी बल मिलेगा।

इसी बीच, पाकिस्तान में ऐतिहासिक गुरुद्वारे से जुड़े विवाद ने धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा का प्रश्न फिर से उठाया है। किसी भी देश की पहचान उसकी विविध सांस्कृतिक धरोहरों से होती है। ऐसे धार्मिक स्थलों का संरक्षण केवल संबंधित समुदाय का नहीं, बल्कि पूरी मानव सभ्यता की साझा जिम्मेदारी है।

विश्व के बदलते परिदृश्य में भारत की विदेश नीति संतुलन, संवाद और राष्ट्रीय हितों पर आधारित दिखाई देती है। आने वाले समय में भारत की यही सक्रिय कूटनीति उसे वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में और अधिक प्रभावशाली भूमिका दिला सकती है।

दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एण्ड पब्लिकेशंस (पंजीकृत)

भारत-नेपाल सीमा विवाद पर नरम पड़े संकेत, बातचीत से समाधान की दिशा में नेपाल

नेपाल सीमा विवाद पर नरम पड़े संकेत, बातचीत से समाधान की दिशा में नेपाल



दैनिक नव परिधि:

विदेश मंत्री ने संसद में दोहराया—ऐतिहासिक दस्तावेजों और द्विपक्षीय वार्ता के आधार पर सुलझेंगे सीमा विवाद; तीसरे पक्ष की भूमिका से दूरी के संकेत।


विष्लेषण:

नेपाल के विदेश मंत्री ने संसद में कहा कि भारत-नेपाल सीमा विवाद का समाधान ऐतिहासिक संधियों, मानचित्रों और द्विपक्षीय कूटनीतिक वार्ता के माध्यम से किया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री बालेन शाह के पहले दिए गए तीसरे पक्ष की संभावित भूमिका वाले बयान पर विवाद हुआ था। अब नेपाल सरकार का आधिकारिक रुख बातचीत और स्थापित द्विपक्षीय तंत्रों पर केंद्रित दिखाई देता है। 

समाचार का विश्लेषण

यह बयान भारत-नेपाल संबंधों में तनाव कम करने का प्रयास माना जा सकता है।

नेपाल सरकार ने संकेत दिया है कि सीमा विवाद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने के बजाय भारत के साथ सीधे संवाद से हल करना बेहतर विकल्प है।

भारत का रुख लंबे समय से यही रहा है कि सीमा संबंधी सभी मुद्दों का समाधान केवल द्विपक्षीय वार्ता से होगा और किसी तीसरे पक्ष की आवश्यकता नहीं है। 

पृष्ठभूमि

भारत और नेपाल के बीच मुख्य विवाद कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों को लेकर है। दोनों देश इन क्षेत्रों पर अपना-अपना दावा करते हैं। हालांकि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध भी बहुत गहरे हैं। 

संभावित प्रभाव

दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में सुधार की संभावना बढ़ सकती है।

सीमा विवाद पर आगे की वार्ताओं का रास्ता आसान हो सकता है।

व्यापार, पर्यटन और सीमा पार सहयोग को भी सकारात्मक गति मिल सकती है।

निष्कर्ष

यह समाचार बताता है कि नेपाल सरकार का आधिकारिक रुख अब अधिक संतुलित और कूटनीतिक दिखाई दे रहा है। यदि दोनों देश ऐतिहासिक साक्ष्यों और स्थापित वार्ता तंत्र के माध्यम से आगे बढ़ते हैं, तो लंबे समय से लंबित सीमा विवाद के समाधान की संभावना मजबूत हो सकती है। हालांकि, अंतिम समाधान दोनों देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और आपसी सहमति पर निर्भर करेगा। 

दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एण्ड पब्लिकेशंस (पंजीकृत)

अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)


Saturday, June 20, 2026

बैंक ऑफ बड़ौदा मानापुर शाखा के प्रबंधक आशीष कुमार मिश्रा को भावभीनी विदाई

बैंक ऑफ बड़ौदा मानापुर शाखा के प्रबंधक आशीष कुमार मिश्रा को भावभीनी विदाई

कई वर्षों की सराहनीय सेवाओं के बाद कौशांबी हुआ स्थानांतरण, ग्रामीणों और ग्राहकों ने किया सम्मानित

दैनिक नव परिधि:



राजा बाजार, जौनपुर:

बैंक ऑफ बड़ौदा की मानापुर शाखा, राजा बाजार के शाखा प्रबंधक आशीष कुमार मिश्रा के कौशांबी जनपद में स्थानांतरण होने पर शाखा परिसर में विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बैंक कर्मचारियों, ग्राहकों तथा क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने उन्हें भावभीनी विदाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।



कई वर्षों तक मानापुर शाखा में अपनी सेवाएं देने के दौरान श्री मिश्रा ने ग्राहकों एवं ग्रामीणों के बीच एक विशिष्ट पहचान बनाई। उनके कार्यकाल में बैंकिंग सेवाओं को अधिक प्रभावी एवं जनहितकारी बनाने के प्रयासों की क्षेत्रीय जनता ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने सदैव ग्राहकों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए सहज एवं सौहार्दपूर्ण व्यवहार से लोगों का विश्वास अर्जित किया।

विदाई समारोह को संबोधित करते हुए आशीष कुमार मिश्रा ने क्षेत्रीय जनता, ग्राहकों एवं बैंक कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मानापुर शाखा में बिताया गया समय उनके जीवन की अमूल्य धरोहर रहेगा। यहां के लोगों से उन्हें जो प्रेम, सम्मान और सहयोग मिला है, उसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानांतरण केवल कार्यस्थल का परिवर्तन है, लेकिन यहां के लोगों से उनके आत्मीय संबंध सदैव बने रहेंगे।

समारोह में बैंक के समस्त स्टाफ के साथ नागेंद्र मिश्रा, योगेश जी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने श्री मिश्रा के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं तथा उनके सफल एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम का वातावरण भावुक रहा तथा उपस्थित लोगों ने श्री मिश्रा के साथ बिताए गए सुखद अनुभवों को साझा किया। अंत में सभी ने उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी।

दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एण्ड पब्लिकेशंस (पंजीकृत)

अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)