उत्तर प्रदेश में पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित हिंदू बंगाली परिवारों का पुनर्वासन निर्णय
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| AI निर्मित केतिक तस्वीर |
दैनिक नव परिधि:
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय सामाजिक न्याय, मानवीय संवेदना और पर्यावरण संरक्षण—तीनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर दशकों से अस्थायी व अवैध परिस्थितियों में रह रहे हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वासन का यह निर्णय राज्य सरकार की दीर्घकालिक पुनर्वास नीति को दर्शाता है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला जनपद मेरठ की तहसील मवाना के ग्राम नंगला गोसाई से जुड़ा है, जहाँ
कुल 99 हिंदू बंगाली परिवार
लंबे समय से झील की भूमि पर अवैध रूप से निवास कर रहे थे
पर्यावरणीय दृष्टि से यह स्थिति संवेदनशील एवं विवादास्पद थी
इन परिवारों के पास न तो स्थायी आवास था और न ही भविष्य की कोई कानूनी सुरक्षा।
मंत्रिमंडल का निर्णय और पुनर्वासन योजना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में इन 99 परिवारों के पुनर्वासन प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।
पुनर्वासन का स्थान
इन परिवारों को जनपद कानपुर देहात, तहसील रसूलाबाद में बसाने का निर्णय लिया गया—
ग्राम भैंसाया
50 परिवार
11.1375 हेक्टेयर (27.5097 एकड़) भूमि
ग्राम ताजपुर तरसौली
49 परिवार
10.530 हेक्टेयर (26.009 एकड़) भूमि
भूमि आवंटन की शर्तें
सरकार द्वारा तय की गई भूमि आवंटन व्यवस्था इस प्रकार है—
प्रत्येक परिवार को 0.50 एकड़ भूमि
30 वर्ष के पट्टे पर भूमि आवंटन
पट्टा 30-30 वर्ष के लिए नवीनीकरण योग्य
अधिकतम पट्टा अवधि: 90 वर्ष
भूमि प्रीमियम अथवा लीज रेंट के आधार पर दी जाएगी
यह व्यवस्था परिवारों को दीर्घकालिक सुरक्षा और स्थायित्व प्रदान करती है।
निर्णय का सामाजिक और मानवीय प्रभाव
यह फैसला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है—
दशकों से विस्थापन झेल रहे परिवारों को
सम्मानजनक जीवन
कानूनी पहचान
स्थायी आवास
बच्चों की शिक्षा, रोजगार और सामाजिक एकीकरण के नए अवसर
अस्थायी जीवन से मुक्ति और भविष्य की सुरक्षा
पर्यावरणीय दृष्टिकोण
झील की भूमि से अवैध अतिक्रमण हटने से—
पर्यावरण संरक्षण को बल
जल स्रोतों की प्राकृतिक स्थिति बहाल होने की संभावना
पारिस्थितिक संतुलन को लाभ
यह निर्णय विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
राजनीतिक एवं प्रशासनिक महत्व
सरकार की पुनर्वासन नीति की स्पष्टता
विस्थापित हिंदू शरणार्थियों के प्रति राज्य की संवेदनशीलता
दीर्घकालिक नीति-निर्माण का संकेत
प्रशासनिक इच्छाशक्ति और निर्णय क्षमता का प्रदर्शन
निष्कर्ष
योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा लिया गया यह पुनर्वासन निर्णय
सामाजिक न्याय
मानवीय गरिमा
पर्यावरण संरक्षण
और प्रशासनिक उत्तरदायित्व
का संतुलित उदाहरण है। यह फैसला न केवल 99 हिंदू बंगाली परिवारों को स्थायी और सुरक्षित भविष्य प्रदान करता है, बल्कि राज्य की समावेशी और संवेदनशील शासन व्यवस्था को भी रेखांकित करता है।
दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एंड पब्लिकेशन (पंजीकृत)
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| अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक) |












