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Sunday, April 26, 2026

काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच की काव्य गोष्ठी हर्षोल्लास के साथ संपन्न

काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच की काव्य गोष्ठी हर्षोल्लास के साथ संपन्न



कवियों और शायरों ने प्रस्तुत कीं उत्कृष्ट रचनाएँ, साहित्यिक वातावरण से गूंजा चन्दुआ-छित्तुपुरा

वाराणसी:

काशी काव्य गंगा साहित्यिक मंच, पंजीकृत वाराणसी की स्थगित गोष्ठी का पुनः आयोजन शनिवार, 25 अप्रैल 2026 को श्रीवास्तव म्युचुअल फंड, नियर हरिनगर, चन्दुआ-छित्तुपुरा स्थित कार्यालय में हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों, कवियों और शायरों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

गोष्ठी की अध्यक्षता परम आदरणीय पंडित आलोक द्विवेदी जौनपुरी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. कृष्ण प्रकाश श्रीवास्तव ‘प्रसन्नानन्द’ उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में सत्यनारायण विश्वकर्मा ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। कार्यक्रम का सफल संचालन संस्था के महासचिव गोपाल केशरी द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्था के अध्यक्ष भुलक्कड़ बनारसी ने अपने स्वागत गीत के माध्यम से अतिथियों एवं उपस्थित साहित्यकारों का अभिनंदन किया। इसके पश्चात गोपाल केशरी द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर गोष्ठी का विधिवत शुभारंभ किया गया।

गोष्ठी में उपस्थित कवियों एवं शायरों में हास्य-व्यंग्य कवि भुलक्कड़ बनारसी, सुबोध सिन्हा उर्फ बच्चा बिहारी, गोपाल केशरी, वाहिद इकबाल, विजय चन्द्र त्रिपाठी, जमाल बनारसी, आशिक बनारसी, फुर्तीला बनारसी, अमरनाथ पेंटर, आलोक द्विवेदी, डॉ. कृष्ण प्रकाश श्रीवास्तव तथा उमेश सिंह सहित अनेक साहित्यकार शामिल रहे।

सभी रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक कविता, ग़ज़ल और व्यंग्य रचनाओं का प्रभावशाली काव्य पाठ किया, जिससे पूरा वातावरण साहित्यिक रस से सराबोर हो गया। श्रोताओं ने भी रचनाओं की भरपूर सराहना की।

अंत में संस्था के अध्यक्ष भुलक्कड़ बनारसी ने सभी अतिथियों, कवियों एवं उपस्थित जनों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। अल्पाहार के उपरांत गोष्ठी को विश्राम दिया गया। कार्यक्रम ने वाराणसी की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

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अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)


Thursday, April 23, 2026

बंगाल और तमिलनाडु में रिकॉर्ड मतदान, आज़ादी के बाद पहली बार बंगाल में 90% से अधिक वोटिंग

बंगाल और तमिलनाडु में रिकॉर्ड मतदान, आज़ादी के बाद पहली बार बंगाल में 90% से अधिक वोटिंग

बंगाल की 152 सीटों पर 92.54% और तमिलनाडु की 234 सीटों पर 84.69% मतदान; पांच दशक बाद बंगाल में लगभग हिंसामुक्त चुनाव, महिलाओं और प्रवासी श्रमिकों की बड़ी भागीदारी

फ़ाइल फोटो 


कोलकाता/चेन्नई:

गुरुवार को पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान ने नया इतिहास रच दिया। पश्चिम बंगाल की 152 सीटों पर 92.54 प्रतिशत और तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 84.69 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा मतदान प्रतिशत माना जा रहा है। खास बात यह रही कि बंगाल में पांच दशक बाद पहली बार लगभग हिंसामुक्त मतदान देखने को मिला।

वर्ष 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 81.16 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि तमिलनाडु में इससे पहले वर्ष 2011 में सर्वाधिक 78.29 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। इस बार दोनों राज्यों में मतदाताओं का उत्साह अभूतपूर्व रहा।

बंगाल में 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान आमतौर पर शांतिपूर्ण रहा। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की लंबी प्रक्रिया के बाद हुए इस चुनाव में हर वर्ग के मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मतदान केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच महिलाओं, युवाओं और विभिन्न राज्यों से लौटे प्रवासी श्रमिकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।

मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के अनुसार, शाम छह बजे के बाद भी कई मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे अंतिम मतदान प्रतिशत और बढ़ने की संभावना जताई गई। पहले चरण के साथ भाजपा के सुवेंदु अधिकारी, दिलीप घोष, कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी, हुमायूं कबीर और शंकर मालाकार समेत कई दिग्गज नेताओं की राजनीतिक किस्मत ईवीएम में कैद हो गई।

चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि रिकॉर्ड मतदान के पीछे दो बड़े कारण रहे—SIR प्रक्रिया का प्रभाव और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था। मतदाता सूची से नाम कटने की आशंका और चुनाव आयोग द्वारा केंद्रीय बलों की 2407 कंपनियों, 2193 क्विक रिस्पांस टीमों तथा 40,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती ने लोगों में विश्वास बढ़ाया।

हालांकि कुछ छिटपुट घटनाएं भी सामने आईं। सिलीगुड़ी में भाजपा प्रत्याशी सुवेंदु सरकार पर हमला हुआ, बीरभूम में केंद्रीय बलों पर पथराव में छह जवान घायल हुए और कुछ स्थानों पर भाजपा नेताओं व पोलिंग एजेंटों पर हमले की खबरें आईं। इसके बावजूद कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई, जिसे चुनाव आयोग ने सकारात्मक संकेत माना है।

तमिलनाडु में भी मतदाताओं ने उत्साहपूर्वक मतदान किया। 5.73 करोड़ मतदाताओं में से 84.69 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। करूर जिला 91.86 प्रतिशत मतदान के साथ सबसे आगे रहा। चेन्नई में 83.09 प्रतिशत, मदुरै में 80.15 प्रतिशत, कोयंबटूर में 84.40 प्रतिशत और तिरुचिरापल्ली में 85.04 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की कोलाथुर सीट पर 85.63 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री एडापडी के. पलानीस्वामी की एडापडी सीट पर 91.61 प्रतिशत वोट पड़े। अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कणगम (TVK) भी इस चुनाव में चर्चा का केंद्र रही।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बंगाल के इतिहास में जब-जब रिकॉर्ड मतदान हुआ है, तब-तब सत्ता परिवर्तन देखने को मिला है। 1967, 1977 और 2011 के चुनाव इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ऐसे में इस बार का रिकॉर्ड मतदान भी राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।

लोकतंत्र के इस महापर्व में मतदाताओं की भारी भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता अब अपने अधिकारों के प्रति पहले से अधिक जागरूक और सजग हो चुकी है।

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अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)


“Value of Life” पेंटिंग ने दिया जीवन का गहरा संदेश — चित्रकार अनिल कुमार राव की अनूठी कलाकृति चर्चा में

“Value of Life” पेंटिंग ने दिया जीवन का गहरा संदेश — चित्रकार अनिल कुमार राव की अनूठी कलाकृति चर्चा में

चित्रकार अनिल कुमार राव की अनूठी कलाकृति- “Value of Life”


BFA, MFA एवं Applied Art (BHU, वाराणसी) से शिक्षित कलाकार ने खीरे और हीरे के प्रतीक से समझाया जीवन का वास्तविक मूल्य

चित्रकार - अनिल कुमार राव 


मिर्जापुर/वाराणसी:

प्रख्यात चित्रकार अनिल कुमार राव की बनाई गई पेंटिंग “Value of Life” इन दिनों कला प्रेमियों और बुद्धिजीवियों के बीच विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है। यह पेंटिंग केवल रंगों का संयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन के मूल्य, कर्म और उद्देश्य का गहरा दार्शनिक संदेश प्रस्तुत करती है।

अनिल कुमार राव ने BFA, MFA तथा Applied Art की शिक्षा Banaras Hindu University से प्राप्त की है। वे रंगोली कला निर्देशन में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं तथा वर्ष 2017 में Guinness Book of World Record से भी सम्मानित हो चुके हैं। वर्तमान में वे BLJ Inter College, Mirzapur, Uttar Pradesh में ड्रॉइंग के व्याख्याता (Lecturer, Drawing) के रूप में कार्यरत हैं।

Value of Life” शीर्षक से बनी इस 20×30 इंच की पेंटिंग के केंद्र में मानव हृदय को दर्शाया गया है, जो जीवन का प्रतीक है। यह हृदय दो हाथों के बीच स्थित है, जो यह संकेत देता है कि मनुष्य का जीवन उसके अपने निर्णयों, कर्मों और सोच के नियंत्रण में होता है।

हृदय के साथ एक तराजू जुड़ा हुआ है, जिसके एक पलड़े में खीरा और दूसरे में हीरा रखा गया है। यहाँ खीरा सस्ते, लक्ष्यहीन और केवल भौतिक सुखों में डूबे जीवन का प्रतीक है, जबकि हीरा उद्देश्यपूर्ण, नैतिकता, ज्ञान, सेवा और आत्मसम्मान से भरे अनमोल जीवन का प्रतिनिधित्व करता है।

चित्रकार ने इस प्रतीकात्मक प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश दिया है कि जीवन की असली कीमत बाहरी वस्तुओं से नहीं, बल्कि व्यक्ति के विचार, कर्म और समाज के प्रति योगदान से तय होती है। यदि जीवन केवल सुख-सुविधाओं तक सीमित रह जाए तो वह खीरे की तरह साधारण हो जाता है, जबकि उच्च आदर्शों और मानवता की सेवा से वही जीवन हीरे की तरह दुर्लभ और मूल्यवान बन जाता है।

यह पेंटिंग आज के समाज को आत्मचिंतन और नैतिक मूल्यों की ओर लौटने का संदेश देती है। कला जगत में इसे एक प्रेरणादायक और विचारोत्तेजक रचना के रूप में सराहा जा रहा है।

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संस्कारों का बदलता आईना: अशोक सरोज की पेंटिंग ने छेड़ी सामाजिक संवाद की नई बहस

संस्कारों का बदलता आईना: अशोक सरोज की पेंटिंग ने छेड़ी सामाजिक संवाद की नई बहस

सामाजिक संवाद दर्शाती अशोक सरोज की पेंटिंग 


मुंबई में कार्यरत वरिष्ठ कैमरामैन, गोल्ड मेडलिस्ट चित्रकार एवं कवि अशोक सरोज ने सास-बहू संबंधों को दो पीढ़ियों के संस्कारों से जोड़ा

वरिष्ठ बालीवुड कैमरामैन, गोल्ड मेडलिस्ट चित्रकार एवं कवि - अशोक सरोज

जौनपुर:

जौनपुर/मुंबई। मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में वरिष्ठ कैमरामैन के रूप में कार्यरत, गोल्ड मेडलिस्ट चित्रकार एवं कवि अशोक सरोज ने अपनी नवीन पेंटिंग के माध्यम से समाज में बदलते पारिवारिक संस्कारों और सास-बहू संबंधों पर गहरी संवेदनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की है। उनकी यह कलाकृति केवल चित्र नहीं, बल्कि सामाजिक चिंतन का दर्पण बनकर सामने आई है।

अशोक सरोज मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद के चारो गांव के निवासी हैं। उनका जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और कला के बल पर मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में एक विशेष पहचान बनाई है।

उनकी बनाई दो पेंटिंग्स विशेष चर्चा का विषय बनी हुई हैं। पहली पेंटिंग में पारंपरिक भारतीय संस्कारों को दर्शाते हुए एक बहू अपनी सास को आदरपूर्वक चाय देती दिखाई गई है। यह दृश्य पुराने समय की पारिवारिक मर्यादा, सम्मान और सेवा भाव को दर्शाता है।

वहीं दूसरी पेंटिंग में आधुनिक परिवेश को चित्रित करते हुए एक सास अपनी बहू को चाय देती नजर आती है। इस चित्र को कलाकार ने आधुनिक रिवाजों और बदलते संस्कारों के स्वरूप से जोड़ा है। इसके माध्यम से उन्होंने यह संदेश भी दिया है कि यदि आज सास अपनी बहू के प्रति प्रेम, सहयोग और सेवा का भाव रखेगी, तो भविष्य में वही बहू भी बुढ़ापे में अपनी सास की सेवा और सम्मान करेगी।

अशोक सरोज का मानना है कि परिवार केवल रिश्तों से नहीं, बल्कि व्यवहार, सम्मान और संस्कारों से मजबूत होता है। उनकी यह पेंटिंग समाज को यह सोचने पर विवश करती है कि बदलते समय में रिश्तों की गरिमा को कैसे बनाए रखा जाए।

उनकी इस कलाकृति को कला प्रेमियों और सामाजिक चिंतकों द्वारा सराहा जा रहा है। यह पेंटिंग आज के समाज में पारिवारिक मूल्यों और पीढ़ियों के बीच संबंधों को समझने का एक सशक्त माध्यम बन गई है।

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श्री माता प्रसाद सिंह इण्टर कॉलेज के मेधावियों ने लहराया परचम, हाईस्कूल में श्रुति-श्रेया और इंटर में शुभम रहे अव्वल

 माता प्रसाद सिंह इण्टर कॉलेज के मेधावियों ने लहराया परचम, हाईस्कूल में श्रुति-श्रेया और इंटर में शुभम रहे अव्वल

यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम में छात्र-छात्राओं का शानदार प्रदर्शन, ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा का बढ़ा मान



बहोरिकपुर, जौनपुर:

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) द्वारा घोषित हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट परीक्षा परिणामों में बहोरिकपुर स्थित प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान श्री माता प्रसाद सिंह इण्टर कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। विद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों ने विज्ञान, कला और हाईस्कूल स्तर पर शानदार अंक प्राप्त कर सफलता का परचम लहराया।

हाईस्कूल में छात्राओं का शानदार दबदबा

हाईस्कूल (10वीं) की बोर्ड परीक्षा में विद्यालय की होनहार छात्रा श्रुति पटेल ने 91.66 प्रतिशत (550/600) अंक प्राप्त कर अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया। श्रुति ने गणित में 97 और अंग्रेजी में 95 अंक हासिल किए।

वहीं, श्रेया पटेल ने 91.50 प्रतिशत (549/600) अंकों के साथ शानदार सफलता अर्जित की। गणित विषय में प्राप्त उनके 98 अंक विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। दोनों छात्राओं की सफलता ने विद्यालय में उत्साह का वातावरण बना दिया।

इण्टरमीडिएट में विज्ञान और कला वर्ग का उत्कृष्ट प्रदर्शन

इण्टरमीडिएट (12वीं) विज्ञान वर्ग में छात्र शुभम ने 83.2 प्रतिशत (416/500) अंकों के साथ प्रथम श्रेणी (ऑनर्स) प्राप्त कर विद्यालय में प्रथम स्थान हासिल किया।

विज्ञान वर्ग के ही अमित यादव ने 82.2 प्रतिशत (411/500) अंक अर्जित किए। उन्होंने जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान—तीनों विषयों में 82-82 अंक प्राप्त कर विशेष योग्यता का परिचय दिया।

कला (मानविकी) वर्ग में छात्रा अदिति दुबे ने 79.8 प्रतिशत (399/500) अंकों के साथ शानदार प्रदर्शन किया। हिंदी विषय में उनके 92 अंक विशेष रूप से सराहनीय रहे।

प्रबंधक और शिक्षकों ने दी बधाई

ग्रामीण परिवेश में उच्च स्तरीय और अनुशासित शिक्षा प्रदान कर रहे इस विद्यालय के शानदार परिणाम पर पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक श्री विवेक सिंह ने कहा,

“यह शानदार परीक्षा परिणाम हमारे विद्यालय के उत्कृष्ट शैक्षणिक परिवेश, बच्चों की अथक लगन और हमारे देवतुल्य शिक्षकों के निस्वार्थ समर्पण का सीधा प्रतिफल है। हमारा संस्थान ग्रामीण प्रतिभाओं को सँवारने और उन्हें बेहतर भविष्य देने के लिए सदैव कृतसंकल्पित है।”

विद्यालय परिवार ने सभी सफल विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय बच्चों के माता-पिता के विश्वास और गुरुजनों के कुशल मार्गदर्शन को दिया।

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Tuesday, April 21, 2026

अशोक सरोज की कलाकृति ‘द एंजेल नंबर

जौनपुर मूल के वरिष्ठ कैमरामैन अशोक सरोज की कलाकृति ‘द एंजेल नंबर’ चर्चा में

वरिष्ठ कैमरामैन व चित्रकार अशोक सरोज की कलाकृति ‘द एंजेल नंबर’


दैनिक नव परिधि:

जौनपुर:

मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में वरिष्ठ कैमरामैन, चित्रकार एवं गोल्ड मेडलिस्ट अशोक सरोज की आध्यात्मिक कलाकृति “द एंजेल नंबर” इन दिनों विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद के चारो गांव के किसान परिवार से संबंध रखने वाले अशोक सरोज ने अपनी इस चित्रकला में ब्रह्मांड, ईश्वरीय ऊर्जा, सफलता और जीवन की उन्नति को प्रतीकों के माध्यम से दर्शाया है।

चित्र के केंद्र में आंख की पुतली के सामने अंकित 111 एंजेल नंबर विशेष आकर्षण का केंद्र है। आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार 111 का अर्थ है कि परमात्मा व्यक्ति के साथ है और उसके जीवन में नई सकारात्मक शुरुआत होने वाली है। इसे अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है।

चित्र में आगे मछली की आकृति बनाई गई है, जो भारतीय परंपरा में समृद्धि, शुभता और निरंतर प्रगति का प्रतीक मानी जाती है। मछली की पूंछ के पास नीले रंग का चेहरा तथा ऊपर मस्तिष्क का चित्रण गहन चिंतन, विवेकशीलता और ब्रह्मांडीय चेतना को दर्शाता है।

मस्तिष्क के पास बनी सीढ़ी ऊपर स्थित एक घर तक जाती है, जिसमें एक व्यक्ति सीढ़ियां चढ़ते हुए घर की ओर अग्रसर है। इसका अर्थ है कि व्यक्ति संघर्ष, विचार और आत्मनियंत्रण के माध्यम से सफलता की ओर बढ़ रहा है। नीला रंग ब्रह्मांडीय शक्ति और आध्यात्मिक गहराई का प्रतीक है, जबकि हरा रंग खुशहाली, समृद्धि और शांति को दर्शाता है।

अशोक सरोज की यह कलाकृति केवल एक चित्र नहीं, बल्कि जीवन का गहरा संदेश प्रस्तुत करती है—जब व्यक्ति सकारात्मक सोच, विवेक और ईश्वर पर विश्वास के साथ आगे बढ़ता है, तब ब्रह्मांड स्वयं उसके मार्ग को प्रशस्त करता है।

कला प्रेमियों और आध्यात्मिक चिंतकों के बीच “द एंजेल नंबर” को एक प्रेरणादायक और गहन संदेश देने वाली रचना के रूप में सराहा जा रहा है।

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