अशोक सरोज की पेंटिंग ने छू लिया दिल – “माँ की ममता” का अमिट चित्रण
जौनपुर/मुंबई –
मायानगरी मुंबई में पेंटिंग के माध्यम से संवेदनाओं की गहराइयों को उकेरने वाले जनपद जौनपुर के युवा कलाकार अशोक सरोज ने एक ऐसी कृति रची है, जिसने देखने वालों के हृदय को झकझोर कर रख दिया। यह पेंटिंग सिर्फ रंगों का मेल नहीं, बल्कि माँ की ममता, त्याग और जीवटता का एक ऐसा मार्मिक दस्तावेज है, जो आंखों को नम कर देता है।
इस चित्र में एक पक्षी दंपत्ति को दिखाया गया है, जो दिन भर भोजन की तलाश में भटकते हैं, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिलता। शाम को जब वे अपने घोंसले पर लौटते हैं, तो उनका शिशु पक्षी भूख से बिलख रहा होता है। पिता पक्षी अपने चोंच से माता पक्षी के सिर पर चोट करता है और माँ अपने लहू की बूंदों से अपने बच्चे की भूख शांत करती है।
यह दृश्य काल्पनिक नहीं, बल्कि उस अपरिमित ममता की प्रतीक है, जो एक माँ किसी भी प्राणी की हो सकती है – मानव हो या पक्षी।
अशोक सरोज की यह पेंटिंग एक सवाल छोड़ जाती है:
क्या आज की दुनिया में हम इतनी संवेदनशीलता बचाए रख पा रहे हैं? क्या माँ के त्याग को हम सच में समझते हैं?
इस पेंटिंग को देखकर केवल कला की तारीफ नहीं होती, बल्कि माँ, ममता और बलिदान की परिभाषा फिर से जीवित हो जाती है।
“यह केवल चित्र नहीं, एक वेदना है, एक कथा है – उस ममता की, जो बिना किसी भाषा के भी सबसे गूढ़ संदेश दे जाती है।”
— अशोक सरोज, चित्रकार (कैमरामैन बालीवुड)
जनपद जौनपुर के इस लाल ने न केवल अपनी प्रतिभा से मायानगरी में पहचान बनाई है, बल्कि अपनी मिट्टी की संवेदनाओं को कैनवस पर उकेरकर पूरे देश को भावुक कर दिया है।
एक भावनात्मक संदेश -:
"यह पेंटिंग मैंने नहीं देखी, मैंने महसूस की है…"
— अमित श्रीवास्तव, संपादक – दैनिक नव परिधि
"जब मैंने अशोक सरोज जी की यह अद्भुत पेंटिंग देखी, तो मेरी आंखें नम हो गईं। यह कोई साधारण चित्र नहीं, बल्कि माँ की ममता का रक्त से लिखा गया दस्तावेज है। उस पक्षिणी की पीड़ा, उसके त्याग और उसके प्रेम ने मुझे भीतर तक झकझोर दिया।
इस पेंटिंग ने यह सिखा दिया कि भूख, दर्द, बलिदान – यह सिर्फ इंसानों की दुनिया तक सीमित नहीं है। ममता हर प्राणी में होती है और शायद पक्षियों में तो और भी ज्यादा निर्मल।
मैं अशोक सरोज जी को दिल से नमन करता हूँ, जिन्होंने हमें यह अहसास दिलाया कि कला सिर्फ रंगों का खेल नहीं, आत्मा की अभिव्यक्ति होती है।"


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