संपादकीय
बदलती विश्व राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका
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| अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक) |
विश्व राजनीति में भारत की सक्रिय उपस्थिति लगातार मजबूत हो रही है। आज सामने आए घटनाक्रम इस बात का संकेत हैं कि भारत केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैशिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।
भारत-जापान शिखर वार्ता इसी दिशा का महत्वपूर्ण उदाहरण है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। यह साझेदारी केवल आर्थिक नहीं, बल्कि एशिया में स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने का भी प्रयास है। ऐसे समय में जब वैश्विक शक्ति संतुलन बदल रहा है, भारत और जापान का सहयोग पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
दूसरी ओर, भारत-पाकिस्तान के बीच जारी कूटनीतिक तनाव यह दर्शाता है कि आतंकवाद और सीमा सुरक्षा के मुद्दे अब भी दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं। पाकिस्तान द्वारा भारतीय दावों का खंडन करना नई बात नहीं है, लेकिन ऐसे मामलों का समाधान केवल बयानबाजी से नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई और पारदर्शिता से ही संभव है। क्षेत्रीय शांति के लिए आतंकवाद के विरुद्ध स्पष्ट और प्रभावी कदम आवश्यक हैं।
भारत-मलेशिया रक्षा सहयोग की समीक्षा भी भारत की "एक्ट ईस्ट" नीति को नई मजबूती देती है। सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास, समुद्री सुरक्षा और उभरते सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग यह संकेत देता है कि भारत अपने मित्र देशों के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक संबंध विकसित कर रहा है। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन और सुरक्षा व्यवस्था को भी बल मिलेगा।
इसी बीच, पाकिस्तान में ऐतिहासिक गुरुद्वारे से जुड़े विवाद ने धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा का प्रश्न फिर से उठाया है। किसी भी देश की पहचान उसकी विविध सांस्कृतिक धरोहरों से होती है। ऐसे धार्मिक स्थलों का संरक्षण केवल संबंधित समुदाय का नहीं, बल्कि पूरी मानव सभ्यता की साझा जिम्मेदारी है।
विश्व के बदलते परिदृश्य में भारत की विदेश नीति संतुलन, संवाद और राष्ट्रीय हितों पर आधारित दिखाई देती है। आने वाले समय में भारत की यही सक्रिय कूटनीति उसे वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में और अधिक प्रभावशाली भूमिका दिला सकती है।
दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एण्ड पब्लिकेशंस (पंजीकृत)

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