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Wednesday, May 20, 2026

रायबरेली की सभा से उठी राजनीतिक बहस: आरोप, प्रत्यारोप और लोकतांत्रिक मर्यादा का प्रश्न

रायबरेली की सभा से उठी राजनीतिक बहस: आरोप, प्रत्यारोप और लोकतांत्रिक मर्यादा का प्रश्न

बयान पर राजनीतिक तूफ़ान — संविधान, आरक्षण और राजनीतिक भाषा पर नई बहस

फ़ाइल फोटो 


दैनिक नव परिधि:

1. घटना का सार

लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली की एक सभा में प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृहमंत्री Amit Shah तथा Rashtriya Swayamsevak Sangh पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “गद्दार” कहा। उनके भाषण में संविधान, निजीकरण, आरक्षण और सरकार की नीतियों की आलोचना प्रमुख रही।

इसके जवाब में भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी की भाषा को अमर्यादित और लोकतांत्रिक मर्यादा के विरुद्ध बताया तथा सार्वजनिक माफी की मांग की।

2. राहुल गांधी के भाषण के मुख्य बिंदु

राहुल गांधी के भाषण में कुछ प्रमुख राजनीतिक संदेश दिखाई देते हैं:

संविधान और सामाजिक न्याय को केंद्रीय मुद्दा बनाना।

सरकारी उपक्रमों के निजीकरण को आरक्षण के कमजोर होने से जोड़ना।

युवाओं में बेरोज़गारी और आर्थिक असंतोष का मुद्दा उठाना।

सरकार और वैचारिक संगठनों पर संस्थागत नियंत्रण के आरोप लगाना।

समर्थकों से अधिक आक्रामक राजनीतिक भाषा अपनाने का आह्वान करना।

यह रणनीति विपक्ष की उस राजनीति से मेल खाती दिखती है जिसमें लोकतांत्रिक संस्थाओं और सामाजिक प्रतिनिधित्व को प्रमुख विषय बनाया जाता है।

3. भाजपा की प्रतिक्रिया: राजनीतिक मर्यादा बनाम राजनीतिक आक्रामकता

भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई।

Yogi Adityanath सहित कई नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक पदों का अपमान बताया। भाजपा नेताओं का तर्क रहा कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को “गद्दार” कहना केवल व्यक्तियों पर नहीं बल्कि जनता के जनादेश पर भी टिप्पणी माना जा सकता है।

भाजपा की प्रतिक्रिया के मुख्य बिंदु:

बयान को असंसदीय और अनुचित बताया गया।

इसे चुनावी निराशा और राजनीतिक हताशा से जोड़ा गया।

कांग्रेस के ऐतिहासिक रिकॉर्ड, विशेषकर आपातकाल, का उल्लेख किया गया।

4. राजनीतिक भाषा और लोकतंत्र: एक व्यापक प्रश्न

भारतीय राजनीति में तीखी भाषा नई नहीं है। परन्तु जब संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए “गद्दार”, “देशविरोधी”, “तानाशाह” जैसे शब्द प्रयुक्त होते हैं, तो बहस केवल विचारधारा की नहीं बल्कि राजनीतिक संवाद की गुणवत्ता की भी बन जाती है।

लोकतंत्र में:

सरकार की आलोचना वैध है।

कठोर राजनीतिक मतभेद भी स्वीकार्य हैं।

लेकिन भाषा की मर्यादा और राजनीतिक जिम्मेदारी पर हमेशा सार्वजनिक विमर्श होता रहता है।

5. राजनीतिक प्रभाव: आगे क्या?

इस बयान के संभावित प्रभाव:

विपक्ष के लिए

समर्थक वर्ग में राजनीतिक ऊर्जा बढ़ सकती है।

लेकिन मध्यमार्गी मतदाताओं पर इसका प्रभाव मिश्रित हो सकता है।

भाजपा के लिए

इसे विपक्ष की “नकारात्मक राजनीति” के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिल सकता है।

जनचर्चा के लिए

संविधान, आरक्षण, निजीकरण और राजनीतिक संवाद की भाषा फिर केंद्र में आ सकती है।

निष्कर्ष

रायबरेली का यह भाषण केवल एक विवादित बयान नहीं बल्कि वर्तमान भारतीय राजनीति के दो बड़े विमर्शों को सामने लाता है—

पहला, संविधान और सामाजिक न्याय की राजनीति;

दूसरा, राजनीतिक असहमति की भाषा की सीमाएँ।

लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राजनीतिक प्रभाव अक्सर केवल विचारों से नहीं, बल्कि उन्हें व्यक्त करने के तरीके से भी तय होता है।

दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एण्ड पब्लिकेशंस (पंजीकृत)

अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)


श्री माता प्रसाद सिंह इण्टर कॉलेज में मेधावियों का हुआ सम्मान, वरिष्ठ परिचारक राजनाथ यादव को दी गई भावभीनी विदाई

 श्री माता प्रसाद सिंह इण्टर कॉलेज में मेधावियों का हुआ सम्मान, वरिष्ठ परिचारक राजनाथ यादव को दी गई भावभीनी विदाई

दैनिक नव परिधि:



जौनपुर (20 मई 2026): 

स्थानीय क्षेत्र बहोरिकपुर स्थित श्री माता प्रसाद सिंह इण्टर कॉलेज में बुधवार को एक भव्य 'प्रतिभा सम्मान एवं विदाई समारोह' का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में जहां एक ओर यूपी बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय का गौरव बढ़ाने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया, वहीं दूसरी ओर विद्यालय में अपना लंबा और अमूल्य समय देने वाले वरिष्ठ परिचारक श्री राजनाथ यादव को उनके सेवानिवृत्त होने पर भावभीनी विदाई दी गई।



मेधावियों ने लहराया परचम

समारोह में हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट के टॉपर्स को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए मेडल व प्रशस्ति पत्र देकर पुरस्कृत किया गया। हाईस्कूल की परीक्षा में अखिलेश कुमार पटेल और सितारा देवी की मेधावी पुत्रियों ने शानदार सफलता हासिल की, जिसमें श्रुति पटेल ने 91.66% अंकों के साथ प्रथम और श्रेया पटेल ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। वहीं इन्द्रमणि के पुत्र सत्यम ने तृतीय स्थान हासिल किया।


इण्टरमीडिएट में धर्मवीर के पुत्र शुभम ने प्रथम, इन्दूराम यादव के पुत्र अमित ने द्वितीय तथा रमाशंकर दुबे की पुत्री अदिति दुबे ने तृतीय स्थान प्राप्त कर विद्यालय और अपने माता-पिता का नाम रोशन किया।



राजनाथ यादव की नि:स्वार्थ सेवाओं को किया गया याद

समारोह का दूसरा चरण अत्यंत भावुक रहा, जब विद्यालय के वरिष्ठ परिचारक श्री राजनाथ यादव को उनकी शानदार शैक्षिक सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने पर सम्मानित किया गया। विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों ने उनके नि:स्वार्थ सेवाभाव, सादगी और समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा उन्हें माल्यार्पण व स्मृति चिह्न भेंट कर उनके स्वस्थ, सुखद एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की।



शिक्षा और संस्कार ही सफलता की कुंजी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रबन्धक श्री विवेक कुमार सिंह और संरक्षक श्री राकेश कुमार सिंह ने सभी मेधावी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। उप-प्रबन्धक श्री सतीश कुमार सिंह ने भी छात्रों का उत्साहवर्धन किया। वहीं, प्रधानाचार्य श्री संतोष कुमार सिंह ने छात्रों को निरंतर आगे बढ़ने और अपने लक्ष्यों के प्रति केंद्रित रहने के लिए प्रेरित किया।


कार्यक्रम का बेहद कुशल एवं सफल संचालन श्री मूलचन्द कन्नौजिया द्वारा किया गया। इस अवसर पर बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए समरनाथ पटेल, धर्मेन्द्र यादव, समरबहादुर पटेल, इन्द्रमणि गौतम और धर्मवीर गौतम सहित भारी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।


पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षक गण- श्री आनन्द कुमार सिंह, श्री लालचन्द खरवार , श्री रवीन्द्रनाथ यादव, श्री राधेश्याम यादव, श्री अच्छेलाल यादव, श्री रंजन कुमार पटेल, श्री अरविन्द कुमार सिंह और श्री सुधीर कुमार यादव की सक्रिय भूमिका रही।

दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एण्ड पब्लिकेशंस (पंजीकृत)

अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)


Monday, May 18, 2026

पंचायत चुनाव का आ गया फैसला

 पंचायत चुनाव का आ गया फैसला 

पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के बाद बढ़ी प्रक्रिया, पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने पर प्रशासकों के हाथ में रह सकता है कामकाज



दैनिक नव परिधि:

राज्य ब्यूरो, लखनऊ:

प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर तस्वीर अब लगभग साफ होती दिखाई दे रही है। राज्य सरकार द्वारा समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का निर्णय लिए जाने के बाद यह माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जा सकेंगे। आयोग की सिफारिशें, सीटों का आरक्षण और निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने में नौ महीने से अधिक समय लगने की संभावना है।

सोमवार को कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही सरकार अब हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चल रही सुनवाई में अपना पक्ष रखेगी। मामले की अगली सुनवाई 19 मई को निर्धारित है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए छह माह का समय दिया गया है। इसके बाद पंचायत सीटों के आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया में लगभग दो महीने लगेंगे। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव कराने की औपचारिकताओं और प्रक्रिया पूरी करने में 35 से 40 दिन का समय चाहिए होगा। इस प्रकार पूरी प्रक्रिया में फरवरी तक का समय निकल सकता है।

इसी अवधि में प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मतदान कार्यक्रम घोषित होने की संभावना है। माना जा रहा है कि फरवरी में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा, जबकि मार्च में मतगणना और नई सरकार का गठन संपन्न होगा। ऐसे में पंचायत चुनाव मार्च से पहले कराए जाने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।

यदि नई सरकार बनने के तुरंत बाद पंचायत चुनाव कराए भी जाते हैं, तो निर्वाचित पंचायतों की पहली बैठक मई-जून तक ही संभव हो सकेगी। इस प्रकार पंचायत चुनाव लगभग एक वर्ष की देरी से संपन्न होंगे। तब तक पंचायतों का संचालन प्रशासक अथवा प्रशासक समितियों के माध्यम से किए जाने की संभावना है।

2021 में इस प्रकार हुए थे पंचायत चुनाव

15, 19, 26 और 29 अप्रैल को मतदान

2 मई को मतगणना

26 मई को ग्राम पंचायतों की पहली बैठक

जुलाई में क्षेत्र एवं जिला पंचायतों की पहली बैठकें

विधानसभा चुनाव 2022 का कार्यक्रम

10 फरवरी से 7 मार्च तक सात चरणों में मतदान

10 मार्च को मतगणना

पंचायतों का कार्यकाल इन तिथियों में हो रहा समाप्त

ग्राम पंचायतें — 26 मई

क्षेत्र पंचायतें — 19 जुलाई

जिला पंचायतें — 11 जुलाई

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अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)


Saturday, May 9, 2026

बंगाल में सत्ता परिवर्तन: सुवेंदु अधिकारी बने मुख्यमंत्री, पांच मंत्रियों ने भी ली शपथ

 बंगाल में सत्ता परिवर्तन: सुवेंदु अधिकारी बने मुख्यमंत्री, पांच मंत्रियों ने भी ली शपथ



प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में हुआ भव्य शपथग्रहण समारोह

कोलकाता:

Suvendu Adhikari ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। राजधानी Kolkata के ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में आयोजित भव्य समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल R. N. Ravi ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर Narendra Modi भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बाद पांच अन्य नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, इन मंत्रियों को कौन-कौन से विभाग दिए जाएंगे, इसका फैसला अभी नहीं किया गया है।

सबसे पहले Dilip Ghosh को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे थे और इस चुनाव में भी उन्होंने पार्टी के लिए अहम भूमिका निभाई।

इसके बाद Agnimitra Paul ने मंत्री पद की शपथ ली। सुवेंदु अधिकारी की कैबिनेट में शामिल होने वाली वह एकमात्र महिला मंत्री हैं। उन्होंने आसनसोल दक्षिण विधानसभा सीट से 40 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की है।

चौथे मंत्री के रूप में Ashok Kirtaniya ने शपथ ली। उन्होंने बोंगाँव उत्तर सीट से लगभग 40 हजार वोटों से जीत हासिल कर सरकार में स्थान बनाया है।

इसके बाद Kshudiram Tudu ने मंत्री पद की शपथ ली। रानीबंध सीट से उन्होंने 50 हजार से अधिक मतों से विजय प्राप्त की थी।

अंत में भाजपा के युवा नेता Nisith Pramanik ने मंत्री पद की शपथ ली। उन्होंने कूचबिहार जिले की माथाभांगा सीट से 57 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की है।

नई सरकार के गठन के साथ अब सभी की नजरें मंत्रिमंडल के विभागों के बंटवारे और सरकार की प्राथमिकताओं पर टिकी हुई हैं।

दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एण्ड पब्लिकेशंस 

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अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)