चुनाव 2026: क्रॉस वोटिंग के डर से ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ की वापसी
दैनिक नव परिधि – विश्लेषण रिपोर्ट:
ओडिशा के विधायक बेंगलुरु और हरियाणा के विधायक शिमला शिफ्ट, दल बदल की आशंका ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
भूमिका
16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले भारतीय राजनीति में एक बार फिर “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” की रणनीति देखने को मिल रही है। क्रॉस वोटिंग की आशंका के चलते कांग्रेस ने अपने विधायकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का फैसला किया है। ओडिशा के कुछ विधायकों को कर्नाटक के बेंगलुरु के पास एक रिसॉर्ट में रखा गया है, जबकि हरियाणा के विधायकों को हिमाचल प्रदेश के शिमला भेजा गया है। यह घटनाक्रम भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक अस्थिरता और दलगत रणनीतियों की जटिलता को उजागर करता है।
ओडिशा: चौथी सीट पर सियासी गणित
ओडिशा में राज्यसभा की चार सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं और पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। 147 सदस्यीय विधानसभा के गणित के अनुसार तीन सीटों का परिणाम लगभग तय माना जा रहा है, जबकि चौथी सीट को लेकर कड़ा मुकाबला है।
बीजेपी के पास 79 विधायक और तीन निर्दलीयों का समर्थन है, यानी कुल 82 सदस्य।
बीजेडी के पास 48 विधायक हैं।
कांग्रेस के पास 14 विधायक और माकपा का एक विधायक है।
इसी सीट पर जीत के लिए बीजेडी उम्मीदवार दत्तेश्वर होता और निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। कांग्रेस ने बीजेडी के उम्मीदवार का समर्थन किया है ताकि भाजपा को तीसरी सीट मिलने से रोका जा सके।
इसी राजनीतिक समीकरण के कारण कांग्रेस को डर है कि उसके कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इस आशंका के चलते पार्टी ने आठ विधायकों को बेंगलुरु के पास एक रिसॉर्ट में भेज दिया है। पार्टी का कहना है कि यह कदम विधायकों को “खरीद-फरोख्त” की कोशिशों से बचाने के लिए उठाया गया है।
बेंगलुरु में ‘सुरक्षित’ विधायक
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, इन विधायकों के रहने की व्यवस्था बेंगलुरु से लगभग 35 किलोमीटर दूर एक अम्यूजमेंट पार्क के रिसॉर्ट में की गई है। बताया जा रहा है कि कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने इस पूरी व्यवस्था का समन्वय किया है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता राम चंद्र कदम ने कहा कि पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखना चाहती है ताकि मतदान के दिन कोई अप्रत्याशित स्थिति न बने।
हरियाणा: शिमला की रणनीति
हरियाणा में भी कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग की आशंका के कारण अपने विधायकों को शिमला भेजने का निर्णय लिया है। राज्य में कांग्रेस के 37 विधायक हैं और अपने उम्मीदवार करमवीर सिंह बौद्ध को जिताने के लिए पार्टी को 31 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता है।
हालांकि निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को भाजपा का समर्थन प्राप्त है, जिसके कारण मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। इसी कारण कांग्रेस नेतृत्व ने अपने विधायकों को शिमला में एक साथ रखने और मतदान से पहले प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है।
हरियाणा में क्रॉस वोटिंग का इतिहास
हरियाणा की राजनीति में क्रॉस वोटिंग कोई नई घटना नहीं है।
2022 में कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन को हार का सामना करना पड़ा था, क्योंकि पार्टी के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी।
2016 में भी कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा था, जब पार्टी के कई वोट तकनीकी कारणों से अमान्य हो गए थे।
इन घटनाओं के कारण कांग्रेस इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
ओपन बैलेट और लोकतांत्रिक चुनौती
राज्यसभा चुनाव में ओपन बैलेट सिस्टम लागू होता है। इसके कारण विधायकों को अपनी पार्टी को दिखाकर वोट देना होता है, लेकिन यदि कोई विधायक क्रॉस वोटिंग करता है तो उसे विधानसभा से अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाते हैं।
विश्लेषण: ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ का संदेश
विधायकों को रिसॉर्ट या दूसरे राज्यों में भेजना भारतीय राजनीति में अब एक सामान्य रणनीति बन चुकी है। यह रणनीति दर्शाती है कि दलों के भीतर अनुशासन और वैचारिक प्रतिबद्धता कमजोर होती जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह प्रवृत्ति लोकतंत्र की उस विडंबना को भी उजागर करती है, जिसमें जनप्रतिनिधियों पर पार्टी का विश्वास कम होता जा रहा है और चुनावी गणित को सुरक्षित रखने के लिए असाधारण उपाय अपनाने पड़ते हैं।
निष्कर्ष
ओडिशा और हरियाणा के घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि राज्यसभा चुनाव केवल संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति और शक्ति संतुलन का महत्वपूर्ण मंच बन चुके हैं। क्रॉस वोटिंग की आशंका और विधायकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की राजनीति आने वाले समय में भी भारतीय लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण बहस बनी रह सकती है।
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