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Saturday, July 5, 2025

अशोक सरोज- एक व्यक्तित्व, एक पहचान:

 



रिपोर्ट:

'सफलता की कुंजी क्या है' इस पर मतभेद हो सकता है, मगर सफलता के अनेक कारणों में लगनशीलता, अनवरत उद्यम और लक्ष्य पर एकाग्रता पर सभी उद्यमी एक मत है। कुछ इन्ही गुणों के आधार पर अपने गाँव, जनपद और प्रदेश का नाम रोशन करने वाले, जनपद जौनपुर के एक छोटे से गाँव से निकल कर मायानगरी मुम्बई में अपना रसूख स्थापित करने वाले अशोक सरोज आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं।

2 फरवरी 1973 को जनपद जौनपुर के विकासखण्ड महराजगंज अंतर्गत ग्राम चारों में जन्में अशोक लगनशील और मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी हैं।

 बचपन से कला प्रेमी होने के कारण चित्रकला से लगाव रहा है। शिक्षा- बी.एफ.ए. (फाइन आर्ट्स) काशी हिन्दू विश्वद्यिालय वारराणसी से हुई है।

 अशोक का कैरियर का सफर बॉलीवुड में सन् 1985 से एक असिस्टेंट कैमरा मैन के रूप में शुरू होता है। जो बाद में चीफ असिसटेन्ट तौर पर फिर आपरेटिव कैमरामैन बन कर बहुत सारे टी. बी. सीरियलस, हिन्दी फिल्में, भोजपुरी, मराठी, गुजराती, पंजाबी एंव तमिल फिल्मों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं।

अशोक सरोज एक प्रतिभावान सिनेमाटोग्राफर है।  एक अच्छे कैमरामैन के साथ-साथ एक बेहद अच्छे  लेखक, कवि, और एक कुशल चित्रकार भी है। इनकी हर पेटिंग एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है। तथा एक संदेश देती है। ऐसे प्रतिभावान व्यक्तित्व आगामी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।





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