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Wednesday, August 20, 2025

 संसद में हंगामा, आपराधिक मामलों में फंसे नेताओं पर कसा जाएगा शिकंजा?



नई दिल्ली, बुधवार।
केंद्र सरकार ने बुधवार को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर कड़ा शिकंजा कसने के लिए विधेयक पेश किया। प्रस्तावित कानून के मुताबिक, यदि कोई जनप्रतिनिधि 30 दिन से अधिक समय तक हिरासत में रहता है, तो 31वें दिन स्वतः ही उसका पद समाप्त हो जाएगा। हालांकि विपक्ष के विरोध और सदन में हंगामे के बीच यह विधेयक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया है।

कानून लागू होने पर यह उन सांसदों और मंत्रियों के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है, जिन पर पहले से ही गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं या जो दोषी करार दिए जा चुके हैं।


चर्चित मामले

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल छह महीने तक हिरासत और जेल में रहे थे। वह अपने पद पर रहते हुए गिरफ्तार होने वाले पहले CM बने। वहीं, तमिलनाडु के मंत्री वी. सेंथिल बालाजी 241 दिन तक जेल में रहे। ऐसे मामलों ने सरकार को कठोर कानून की दिशा में कदम उठाने के लिए मजबूर किया।


कितने सांसद आपराधिक मामलों में घिरे?

गैर-सरकारी संस्था ADR की रिपोर्ट बताती है कि वर्तमान 18वीं लोकसभा के 543 सांसदों में से 251 (46%) सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
इनमें से 25 से ज्यादा सांसद पहले ही दोषी करार दिए जा चुके हैं।

  • 2004: 125 (23%) सांसदों पर मामले
  • 2009: 162 (30%)
  • 2014: 185 (34%)
  • 2019: 233 (43%)
  • 2024 (18वीं लोकसभा): 251 (46%)

स्पष्ट है कि चुनाव-दर-चुनाव आपराधिक छवि वाले सांसदों की संख्या बढ़ रही है।


किस पार्टी में सबसे ज्यादा आपराधिक छवि वाले सांसद?

  • भाजपा: 240 में से 94 (39%)
  • कांग्रेस: 99 में से 49 (49%)
  • सपा: 37 में से 21 (56%)
  • टीएमसी: 29 में से 13 (44%)
  • डीएमके: 22 में से 13 (59%)
  • टीडीपी: 16 में से 8 (50%)
  • शिवसेना: 7 में से 5 (71%)

गंभीर आपराधिक मामलों की बात करें तो

  • भाजपा के 63 (26%)
  • कांग्रेस के 32 (32%)
  • सपा के 17 (46%)
  • टीएमसी के 7 (24%)
  • डीएमके के 6 (27%)
  • टीडीपी के 5 (31%)
  • शिवसेना के 4 (57%) सांसदों पर आरोप हैं।

तीन प्रमुख विधेयक

केंद्र सरकार ने इस मुद्दे से जुड़े तीन संशोधन विधेयक पेश किए हैं:

  1. केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025

    • 1963 के कानून में कोई प्रावधान नहीं था कि गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार CM या मंत्री को हटाया जा सके।
    • संशोधन कर इसे अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव।
  2. संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025

    • संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में बदलाव कर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को 30 दिन से अधिक हिरासत पर पद से हटाने का प्रावधान।
  3. जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025

    • मौजूदा 2019 के अधिनियम में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
    • धारा 54 में संशोधन कर CM या मंत्री को 30 दिन से अधिक हिरासत की स्थिति में पद से हटाने का प्रावधान।

निष्कर्ष

यदि यह विधेयक कानून का रूप लेता है, तो भारतीय राजनीति में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं पर बड़ा असर पड़ेगा। यह न सिर्फ उनकी सांसदी या मंत्री पद पर संकट लाएगा बल्कि भविष्य के चुनावी समीकरणों को भी गहराई से प्रभावित करेगा।


अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)


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