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Saturday, August 9, 2025

पाँच घड़ों में मनुष्य का सच - जीवन का दार्शनिक चित्रण

पाँच घड़ों में मनुष्य का सच — अशोक सरोज की अनोखी पेंटिंग में जीवन का दार्शनिक चित्रण


पेंटिंग- अशोक सरोज 


📰 दैनिक नव परिधि
रिपोर्ट: अमित श्रीवास्तव

जौनपुर, 10 अगस्त।
कहते हैं कला सिर्फ देखने की चीज़ नहीं, महसूस करने की प्रक्रिया है। मुम्बई के प्रसिद्ध बॉलीवुड कैमरामैन और चित्रकार अशोक सरोज ने अपनी नवीनतम पेंटिंग में इस बात को सिद्ध कर दिया है। वर्षों तक फिल्म इंडस्ट्री के कैमरे से कहानी कहने वाले अशोक सरोज ने इस बार ब्रश और रंगों के सहारे मनुष्य के भीतर बसे पाँच बड़े भावों को पाँच घड़ों में समेटा है।

यह पेंटिंग न केवल रंगों का एक अद्भुत संगम है, बल्कि एक गहन दार्शनिक संदेश भी देती है। इसमें दर्शाए गए पाँच घड़े, मानव जीवन के पाँच प्रमुख पहलुओं — संतोष, अहंकार, ईर्ष्या, लालच और पाप — का जीवंत प्रतीक हैं।

  1. हरा घड़ा — संतोष
    पूरी तरह सफेद रंग से भरा यह हरा घड़ा शांति और संतोष का प्रतीक है। पृष्ठभूमि में महात्मा बुद्ध की तस्वीर है, जो त्याग, संयम और आत्मिक शांति का संदेश देती है। यह बताती है कि संतोष ही मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा धन है।

  2. लाल घड़ा — अहंकार
    सुनहरे प्रकाश से भरा लाल घड़ा अहंकार का प्रतीक है। इसके पीछे रावण की तस्वीर है — यह याद दिलाती है कि अपार ज्ञान और शक्ति के बावजूद अहंकार पतन का कारण बन सकता है।

  3. आधा टूटा घड़ा — ईर्ष्या
    नीचे से रिसता हुआ आधा टूटा घड़ा द्वेष और ईर्ष्या का प्रतीक है। पृष्ठभूमि में दुर्योधन की तस्वीर, यह दर्शाती है कि जलन और द्वेष अंततः रिश्तों और साम्राज्यों को भी नष्ट कर देते हैं।

  4. आधा अधूरा घड़ा — लालच
    ऊपर से अधूरा, कभी न भरने वाला यह घड़ा लालच का प्रतीक है। पृष्ठभूमि में एक चोर की तस्वीर, यह स्पष्ट करती है कि लालच ऐसा कुआँ है, जो जितना भरने की कोशिश करो, उतना ही खाली लगता है।

  5. टूटा-बिखरा घड़ा — पाप
    पूरी तरह टूट कर बिखर चुका यह घड़ा पाप का प्रतीक है, जो मनुष्य को भीतर से तोड़कर समाप्त कर देता है। इस हिस्से में रंगों का बिखराव और टूटन, अंत के दर्द और विखंडन को दर्शाता है।

अशोक सरोज ने इस पेंटिंग के बारे में कहा, "मनुष्य के भीतर ये पाँच ‘घड़े’ हमेशा मौजूद रहते हैं। इनमें कौन सा घड़ा कितना भरा है, यही तय करता है कि वह जीवन में किस दिशा में जाएगा।"

कला समीक्षकों का मानना है कि अशोक सरोज की यह पेंटिंग सिर्फ दीवार सजाने के लिए नहीं, बल्कि आत्ममंथन करने का एक दर्पण है।



दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एंड पब्लिकेशन (पंजीकृत)

अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)

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