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| चित्रकार अशोक सरोज |
📰 कला पर विशेष रिपोर्ट
शीर्षक:
स्त्री-शक्ति का प्रतीक: अशोक सरोज की कला में स्त्री और बैल का अद्भुत संगम
उपशीर्षक:
- महिला और बैल का स्केच—समर्पण और शक्ति का गहरा संदेश
- ग्राम चारो से मुंबई तक, अशोक सरोज की कलात्मक यात्रा
- महात्मा गांधी नेशनल सर्विस अवार्ड 2025 और गोल्ड अवार्ड से सम्मानित
- समाज को आईना दिखाती कला—स्त्री की शक्ति को मान्यता
विश्लेषणात्मक रिपोर्ट:
जौनपुर जनपद के महराजगंज विकासखंड के ग्राम चारो से ताल्लुक रखने वाले अशोक सरोज, बॉलीवुड के वरिष्ठ कैमरामैन और फाइन आर्टिस्ट हैं। मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में सैकड़ों फिल्मों और सीरियलों में कैमरे का जादू दिखाने वाले अशोक सरोज को हाल ही में महात्मा गांधी नेशनल सर्विस अवार्ड 2025 तथा मणिकर्णिका आर्ट गैलरी की 45वीं इंटरनेशनल ऑनलाइन आर्ट एग्ज़ीबिशन एंड कम्पटीशन में गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
उनका नवीनतम स्केच, जिसमें एक महिला और एक बैल को चित्रित किया गया है, गहरी सामाजिक और दार्शनिक सोच को दर्शाता है। इस कलाकृति का भाव है—
👉 "यदि स्त्री अपने आप को समर्पित कर दे तो पुरुष, चाहे वह कितना भी कठोर या जानवर जैसा क्यों न हो, अंततः उसके आगे झुक जाता है।"
इस रेखाचित्र की सरल रेखाएँ और गहरे शेड्स, महिला की कोमलता और बैल की कठोरता के बीच के अद्भुत सामंजस्य को प्रकट करते हैं। यह चित्र केवल कला का नमूना नहीं, बल्कि समाज में स्त्री के महत्व और उसकी शक्ति का संदेश है।
गाँव की गरीबी और संघर्षों से निकलकर, अशोक सरोज का यह मुकाम हासिल करना पूर्वांचल के युवाओं के लिए प्रेरणा है।
👉 दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एंड पब्लिकेशन (पंजीकृत)
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| अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक) |


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