🎬 न्यूज विश्लेषण रिपोर्ट
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में स्टंट कलाकारों की सुरक्षा पर सवाल
(अमित श्रीवास्तव)
📰 शीर्षक
“मनोरंजन की कीमत: भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में स्टंट कलाकारों की मौत का बढ़ता सिलसिला”
📰 उपशीर्षक
“चार साल में 20 से अधिक स्टंटमैन की मौत, सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल”
🔎 पृष्ठभूमि
भारतीय फिल्म उद्योग, जिसे अक्सर दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री कहा जाता है, अपनी भव्यता, ऐक्शन और जोखिम भरे स्टंट्स के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन इन चकाचौंध भरे दृश्यों के पीछे कई स्टंट कलाकार अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं। हाल के वर्षों में इन कलाकारों की मौत और गंभीर दुर्घटनाओं की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं।
📌 हालिया घटनाएँ
- जुलाई 2025 में फिल्म Vettuvam की शूटिंग के दौरान स्टंटमैन एस. मोहनराज (SM Raju) की कार स्टंट करते समय दर्दनाक मौत हो गई।
- 2024 में एस. एझुमलाई 20 फीट की ऊँचाई से गिरकर चल बसे।
- 2022 में फिल्म Viduthalai Part 1 की शूटिंग में एन. सुरेश की मृत्यु हुई।
- 2021 में Love You Rachu के सेट पर विवेक की इलेक्ट्रोक्यूशन से मौत हुई।
- इससे पहले 2016 में Maasthi Gudi के दौरान दो कलाकारों की हेलीकॉप्टर से झील में कूदने के बाद मौत हो गई थी।
📊 आंकड़े और स्थिति
- FEFSI (Film Employees Federation of South India) के अनुसार, Indian 2 से Sardar 2 तक केवल चार साल में 20 से अधिक स्टंटमैनों की मौत हुई है।
- भारतीय सिनेमा में सुरक्षा मानकों की कमी और जोखिम भरे स्टंट्स का दबाव इन मौतों का मुख्य कारण माना जा रहा है।
🗣️ प्रमुख पक्षों की राय
🎥 फिल्म यूनियन (FEFSI)
- अध्यक्ष आर.के. सेल्वमणि ने कहा—“निर्माताओं की लापरवाही और सुरक्षा उपकरणों की कमी की वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं।”
- वे चाहते हैं कि सेट पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य की जाए।
👨🎬 फिल्म निर्माता और निर्देशक
- निर्माताओं का तर्क है कि “एक्शन दृश्यों की डिमांड और दर्शकों की उम्मीदें” स्टंट्स को और अधिक खतरनाक बना देती हैं।
- हालांकि वे मानते हैं कि सुरक्षा मानकों में सुधार की आवश्यकता है।
🧑🤝🧑 पीड़ित परिवार और साथी कलाकार
- परिवारों का आरोप है कि बीमा और मुआवजे की कमी सबसे बड़ी समस्या है।
- साथी कलाकार कहते हैं कि स्टंटमैनों को “सिर्फ expendable worker” समझा जाता है, जबकि उन्हीं के दम पर फिल्में सफल होती हैं।
⚖️ विश्लेषण
- मुख्य समस्या: सुरक्षा मानकों की अनदेखी, बीमा/मुआवजा न मिलना, और पेशेवर सुरक्षा टीम की कमी।
- आर्थिक पहलू: कम बजट फिल्मों में सुरक्षा पर कटौती की जाती है, जिससे कलाकारों की जान खतरे में पड़ती है।
- सांस्कृतिक पहलू: भारतीय दर्शक वास्तविक और खतरनाक स्टंट्स को पसंद करते हैं, जिससे निर्माताओं पर दबाव बढ़ता है।
✅ निष्कर्ष और सुझाव
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को यह स्वीकार करना होगा कि स्टंट कलाकार सिर्फ पर्दे के पीछे के मजदूर नहीं, बल्कि असली नायक हैं।
- सभी स्टंट्स के लिए सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य हो।
- प्रत्येक कलाकार का बीमा और मुआवजा तयशुदा हो।
- अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षा उपकरण और मेडिकल टीम सेट पर मौजूद हो।
जब तक यह कदम नहीं उठाए जाते, तब तक भारतीय सिनेमा की चमक के पीछे स्टंट कलाकारों की जान की कीमत चुकाई जाती रहेगी।
👉 दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एंड पब्लिकेशन (पंजीकृत)
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| अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक) |


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