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Wednesday, November 5, 2025

तीन लोग रात में नहीं सोते" — बालीवुड कैमरामैन और गोल्ड मेडलिस्ट चित्रकार अशोक सरोज का दार्शनिक चित्र चर्चा में

 

आयल पेंटिंग, साइज 12×20

📰 न्यूज़ विश्लेषण रिपोर्ट
शीर्षक: "तीन लोग रात में नहीं सोते" — बालीवुड कैमरामैन और गोल्ड मेडलिस्ट चित्रकार अशोक सरोज का दार्शनिक चित्र चर्चा में

उपशीर्षक: जौनपुर के छोटे से गाँव ‘चारो’ से निकलकर मुम्बई तक का सफ़र — कला में दर्शन और जीवन के यथार्थ का संगम


📍भूमिका

कला केवल सौंदर्य का नहीं, बल्कि विचार का भी माध्यम होती है। यही संदेश लेकर आए हैं बालीवुड के वरिष्ठ कैमरामैन और अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडलिस्ट चित्रकार अशोक सरोज, जिन्होंने अपने नवीनतम चित्र में जीवन के तीन सत्य रूपों — रोगी, भोगी और योगी — को प्रतीकात्मक ढंग से प्रस्तुत किया है।


🎨 चित्र का सार

अशोक सरोज द्वारा निर्मित यह चित्र दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत गूढ़ है। इसमें उन्होंने यह दर्शाया है कि —

“तीन लोग रात में नहीं सोते — रोगी, भोगी और योगी।”

  • रोगी, क्योंकि उसे शारीरिक पीड़ा चैन नहीं लेने देती।
  • भोगी, क्योंकि उसकी इच्छाएँ और कामनाएँ कभी पूर्ण नहीं होतीं।
  • योगी, क्योंकि वह जागरण में ही मुक्ति खोजता है।

यह तीनों अवस्थाएँ मानव जीवन के तीन आयामों को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाती हैं — कष्ट, वासना और ध्यान


🌱 जौनपुर से मुंबई तक की यात्रा

जौनपुर जनपद के छोटे से गाँव चारो से निकलकर अशोक सरोज ने अपने सपनों की राह मुम्बई तक बनाई।
बालीवुड में उन्होंने बतौर सीनियर कैमरामैन अनेक चर्चित परियोजनाओं पर कार्य किया और चित्रकला में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्राप्त की।
उनकी कला में ग्रामीण सादगी और शहरी संवेदना का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।


🪶 कला में दर्शन की झलक

अशोक सरोज का यह चित्र केवल एक रचना नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन का रूपक है।
उन्होंने अपने कैनवास पर यह स्पष्ट किया है कि—

  • रोग से पीड़ित व्यक्ति शरीर की वेदना से जूझता है,
  • भोग में लिप्त व्यक्ति मन की तृष्णा से,
  • और योग में लीन व्यक्ति आत्मा के जागरण से।

तीनों ही ‘नींद’ से वंचित हैं, पर उनके उद्देश्यों में गहरा अंतर है।


📸 निष्कर्ष

अशोक सरोज का यह चित्र केवल कलात्मक नहीं, बल्कि दार्शनिक विमर्श का विषय है।
यह दर्शाता है कि जागरण केवल शरीर का नहीं, बल्कि चेतना का प्रतीक है।
जौनपुर की धरती से उठे इस कलाकार ने यह सिद्ध किया कि सच्ची कला न तो स्थान की मोहताज होती है, न परिस्थिति की — वह बस सत्य की खोज होती है।


दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एंड पब्लिकेशन (पंजीकृत)

अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)


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