संस्कारों का बदलता आईना: अशोक सरोज की पेंटिंग ने छेड़ी सामाजिक संवाद की नई बहस
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| सामाजिक संवाद दर्शाती अशोक सरोज की पेंटिंग |
मुंबई में कार्यरत वरिष्ठ कैमरामैन, गोल्ड मेडलिस्ट चित्रकार एवं कवि अशोक सरोज ने सास-बहू संबंधों को दो पीढ़ियों के संस्कारों से जोड़ा
वरिष्ठ बालीवुड कैमरामैन, गोल्ड मेडलिस्ट चित्रकार एवं कवि - अशोक सरोज
जौनपुर:
जौनपुर/मुंबई। मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में वरिष्ठ कैमरामैन के रूप में कार्यरत, गोल्ड मेडलिस्ट चित्रकार एवं कवि अशोक सरोज ने अपनी नवीन पेंटिंग के माध्यम से समाज में बदलते पारिवारिक संस्कारों और सास-बहू संबंधों पर गहरी संवेदनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की है। उनकी यह कलाकृति केवल चित्र नहीं, बल्कि सामाजिक चिंतन का दर्पण बनकर सामने आई है।
अशोक सरोज मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद के चारो गांव के निवासी हैं। उनका जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और कला के बल पर मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में एक विशेष पहचान बनाई है।
उनकी बनाई दो पेंटिंग्स विशेष चर्चा का विषय बनी हुई हैं। पहली पेंटिंग में पारंपरिक भारतीय संस्कारों को दर्शाते हुए एक बहू अपनी सास को आदरपूर्वक चाय देती दिखाई गई है। यह दृश्य पुराने समय की पारिवारिक मर्यादा, सम्मान और सेवा भाव को दर्शाता है।
वहीं दूसरी पेंटिंग में आधुनिक परिवेश को चित्रित करते हुए एक सास अपनी बहू को चाय देती नजर आती है। इस चित्र को कलाकार ने आधुनिक रिवाजों और बदलते संस्कारों के स्वरूप से जोड़ा है। इसके माध्यम से उन्होंने यह संदेश भी दिया है कि यदि आज सास अपनी बहू के प्रति प्रेम, सहयोग और सेवा का भाव रखेगी, तो भविष्य में वही बहू भी बुढ़ापे में अपनी सास की सेवा और सम्मान करेगी।
अशोक सरोज का मानना है कि परिवार केवल रिश्तों से नहीं, बल्कि व्यवहार, सम्मान और संस्कारों से मजबूत होता है। उनकी यह पेंटिंग समाज को यह सोचने पर विवश करती है कि बदलते समय में रिश्तों की गरिमा को कैसे बनाए रखा जाए।
उनकी इस कलाकृति को कला प्रेमियों और सामाजिक चिंतकों द्वारा सराहा जा रहा है। यह पेंटिंग आज के समाज में पारिवारिक मूल्यों और पीढ़ियों के बीच संबंधों को समझने का एक सशक्त माध्यम बन गई है।
दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एण्ड पब्लिकेशंस (पंजीकृत)


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