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| फाइल फोटो |
📰 लद्दाख हिंसा: लेह में कर्फ्यू जारी, सोनम वांगचुक गिरफ्तार – राजनीतिक आंदोलन पर संकट
✒️ दैनिक नवपारिधि न्यूज़ विश्लेषण रिपोर्ट
लेह, 27 सितम्बर 2025।
लद्दाख के लेह में 24 सितम्बर को भड़की हिंसा के बाद हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में कर्फ्यू लगा रखा है, जबकि चर्चित पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
लद्दाख के डीजीपी डॉ. एस.डी. सिंह जामवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि “लद्दाख के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब इतनी व्यापक हिंसा, आगजनी और सुरक्षाबलों पर हमले हुए।” इस घटना में 4 लोगों की मौत हो गई और 150 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें सुरक्षाबल और नागरिक दोनों शामिल हैं।
🔴 हिंसा की झलक
- 5000-6000 लोगों की भीड़ ने मार्च किया।
- सरकारी इमारतों और पार्टी कार्यालयों को आग के हवाले किया गया।
- पथराव और सुरक्षाबलों पर हमले हुए।
- आत्मरक्षा में गोलीबारी करनी पड़ी, जिसमें 4 नागरिकों की जान चली गई।
🟠 राजनीतिक पृष्ठभूमि
- 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बने लद्दाख में लंबे समय से छठी अनुसूची और राज्य का दर्जा देने की मांग चल रही है।
- लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से वार्ता करते रहे हैं।
- 25-26 सितम्बर को दिल्ली में बैठक तय थी, लेकिन ठीक उससे पहले हिंसा भड़क उठी।
🟡 डीजीपी का बयान और आरोप
- डीजीपी ने कहा कि आंदोलन को “तथाकथित पर्यावरण कार्यकर्ता” सोनम वांगचुक और अन्य समूहों ने हाईजैक कर लिया।
- भूख हड़ताल को शांति मंच के बजाय हिंसा का अड्डा बनाया गया।
- शरारती तत्वों को आमंत्रित कर भीड़ को भड़काया गया।
🔵 सुरक्षाबलों पर हमला
- सीआरपीएफ जवान की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई, वह गंभीर हालत में अस्पताल में है।
- एक इमारत में आग लगाते समय चार महिला पुलिसकर्मी अंदर फंसी हुई थीं।
- अब तक 70-80 सुरक्षाबल घायल हो चुके हैं।
🟢 नागरिक हताहत
- 70-80 नागरिक घायल, जिनमें से 7 गंभीर हालत में हैं।
- एक लड़की को इलाज के लिए दिल्ली रेफ़र किया गया।
- कई लोग अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं।
⚖️ विश्लेषण
- यह हिंसा केवल कानून-व्यवस्था का संकट नहीं, बल्कि लद्दाख के राजनीतिक आंदोलन की विश्वसनीयता पर भी गहरा सवाल है।
- सोनम वांगचुक जैसी प्रतिष्ठित शख्सियत पर हिंसा भड़काने का आरोप आंदोलन को नैतिक रूप से कमजोर करता है।
- केंद्र सरकार और स्थानीय नेतृत्व के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है – लद्दाख की जनता के भरोसे को बहाल करना और राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना।
👉 दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एंड पब्लिकेशन (पंजीकृत)
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| अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक) |


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