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Thursday, October 16, 2025

शीर्षक: बंधन (रचनाकार अशोक सरोज) पेस्टल एण्ड पेपर
साइज: 21×29 सेंटीमीटर



📰 शीर्षक:

गाँव की गलियों से बॉलीवुड के पर्दे तक — अशोक सरोज की प्रेरणादायक यात्रा

🧭 उपशीर्षक:

जौनपुर के छोटे से गाँव से निकलकर बने बॉलीवुड के सीनियर कैमरामैन और अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडलिस्ट चित्रकार, जिनकी कला समाज के गहरे संदेश देती है।


रिपोर्ट: अमित श्रीवास्तव

(दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एंड पब्लिकेशन)

जौनपुर जनपद के विकासखण्ड महराजगंज क्षेत्र के ग्राम चारो से निकलकर मुंबई की चकाचौंध भरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अशोक सरोज आज बॉलीवुड के सीनियर कैमरामैन और अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्वर्ण पदक प्राप्त चित्रकार हैं। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने अपने परिश्रम और रचनात्मक दृष्टि से कला जगत में वह मुकाम हासिल किया है, जो बहुतों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

अशोक सरोज का कहना है कि “कला केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि समाज के भीतर छिपी संवेदनाओं को जीवंत करने का माध्यम है।” उनकी कई पेंटिंग्स सामाजिक सरोकारों को छूती हैं, जिनमें एक अनोखी गहराई दिखाई देती है।


🎨 पेंटिंग शीर्षक:

“बंधन” (The Bond)

पेंटिंग का संदेश:

अशोक सरोज की यह पेंटिंग एक ग्रामीण दृश्य को चित्रित करती है —
एक छोटी लड़की बकरी चराने निकली है। बकरी के गले में बंधी रस्सी को वह अपने हाथों से थामे हुए है। उसी क्षण सामने से एक दुल्हन की डोली गुजरती है। बच्ची ठिठककर डोली को देखती है और अपने मन में तुलना करती है — बकरी और दुल्हन दोनों ही किसी न किसी “बंधन” में बंधी हैं।

बकरी सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है, तो दुल्हन परंपरागत बंधन का। अशोक सरोज ने इस चित्र के माध्यम से यह गहरी अनुभूति दी है कि जीवन में स्वतंत्रता और जिम्मेदारी, दोनों का अपना अलग अर्थ है — परंतु हर बंधन में एक भावनात्मक करुणा छिपी होती है।


समापन टिप्पणी:

अशोक सरोज की कला हमें यह सिखाती है कि समाज में हर व्यक्ति किसी न किसी भूमिका में बंधा है, परंतु उस बंधन में भी सौंदर्य, समर्पण और संवेदना की झलक छिपी है। यही संवेदनशील दृष्टि उन्हें एक सच्चा कलाकार बनाती है।


दैनिक नव परिधि मीडिया सर्विसेज एंड पब्लिकेशन (पंजीकृत)

अमित श्रीवास्तव (प्रधान संपादक)


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